top of page

शरीर में तिल होने का शुभाशुभ फल

स्थान---------------फल

माथे पर---------------बलवान हो

ठुड्डी में---------------स्त्री से प्रेम न रहे

दोनों भौंह के बीच---------------यात्रा होती रहे

दाहिनी आँख पर---------------स्त्री से प्रेम रहे

बायीं आँख पर---------------स्त्री से कलह रहे

दाहिने गाल पर---------------धनवान् हो

बाँयें गाल पर---------------खर्च बढ़ता जायें

होंठ पर---------------विषय-वासना में रत रहे

कान पर---------------दीर्घायु हो

गर्दन पर---------------आराम मिले

दाहिनी भुजा पर---------------मान-प्रतिष्ठा मिले

बाँयी भुजा पर---------------झगड़ालू हो

नाक पर---------------यात्रा होती रहे

दाहिनी छाती पर---------------स्त्री से प्रेम रहे

बाँयी छाती पर---------------स्त्री से झगड़ा रहे

कमर में---------------आयु परेशानी से गुजरे

दोनों छाती के बीच---------------जीवन सुखी रहे

पेट पर---------------उत्तम भोजन का इच्छुक

पीठ पर---------------प्रायः यात्रा में रहा करे

दाहिनी हथेली पर---------------बलवान हो.

बाँयी हथेली पर---------------खूब खर्च करे

दाहिने हाथ की पीठ पर ---------------धनवान हो

बाँयें हाथ की पीठ पर ---------------कम खर्च करे

दाहिने पैर में---------------बड़ा बुद्धिमान् हो

बाँयें पैर में---------------खर्च अधिक हो

59 views0 comments

Recent Posts

See All

हर एक व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी प्रकार की समस्याएं अवश्य उत्त्पन्न होती है लेकिन उस पर सबसे अधिक प्रभाव वैवाहिक जीवन में होने वाली समस्याओं से पड़ता है। हम इन उत्त्पन होने वाली समस्याओं को कुछ सं

प्रकृति के पंचतत्व और शरीर के पंचतत्वों के बीच सामंजस्य रखने के लिए हमें वास्तु की आवश्यकता होती है| जिस प्रकार हम शरीर के सभी अंगो का उपयोग ठीक प्रकार से इसलिए कर पाते है क्यूंकि उनका स्थान नियत है|

१. सभी कुछ ठीक होने के बाद भी घर में संतान न होना| २.बिना वजह अस्वस्थ रहना| ३.आर्थिक तथा मानसिक समस्या का रहना| ४.नींद न आना तथा अत्यधिक गुस्सा- चिड़चिड़ापन रहना| ५. पारिवारिक सम्बन्धो में दरार आना| ६.

bottom of page