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शरीर पर छिपकली तथा गिरगिट गिरने का फल

सिर पर छिपकली गिरने से राज्य लाभ, ललाट पर बन्धु दर्शन, दोनों भौहों पर बड़े लोगों से मित्रता, ऊपर के ओठ पर धनहानि, नीचे के ओठ पर ऐश्वर्य प्राप्ति, नाक पर रोग, दाहिने कान पर आयु-वृद्धि, बांये कान पर धन-प्राप्ति. दोनों आँख पर धन लाभ, दाहिनी मुजा पर नृपतुल्यता, बाँयी भुजा पर राज्यभय, कण्ठ पर शत्रुनाश, दोनों स्तनों पर दुर्भाग्य, पेट पर भूषण-लाभ, पीठ पर बुद्धिनाश, घुटने पर शुभ-आगमन, जपा पर शुभ, दोनों हाथों पर वस्त्रलाभ , कन्धों पर विजय, नासिका (नाक) छिद्रों पर धनप्राप्ति, कमर पर हाथी-घोड़ा आदि की सवारी का लाभ, दायें मणिबन्ध पर कीर्ति-विनाश, हृदय पर धनलाभ, मुख पर मिष्ठानभोजन, गुल्फ पर बन्धन-प्राप्ति, दाड़ी पर मृत्य दहिने पैर पर गमन, बाँये पैर पर नाश, पैर के कर मृत्यु तुल्य कष्ट।

विशेष : सोमवार, बुधवार, गुरुवार एवं शुक्रवार को, प्रतिपदा, द्वितीया,पञ्चमी, षष्ठी, दशमी, एकादशी तथा द्वादशी तिथियों में, पुष्य, अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी, पुनर्वसु, हस्त, स्वाती, अनुराधा, धनिष्ठा, शतभिष और रेवती नक्षत्रों में पुरुषों के दाहिने अंग तथा स्त्रियों के बाँयें| अंग पर छिपकली का गिरना शुभप्रद होता है। जन्म-नक्षत्र, मृत्यु योग, दग्ध योग तथा भद्रा में, पापग्रह युक्त लग्न हो तथा चन्द्रमा आठवें हों तो छिपकली का गिरना अशुभ फलदायक होता है। इसकी शान्ति के लिए वस्त्र सहित स्नान कर तिल, उड़द का दान, शिव मन्दिर में दीपदान एवं स्वर्ण-दान अथवा मृत्युजय मन्त्र 'ॐ हौं जूं सः' तथा शिव का षडक्षर मन्च 'ॐ नमः शिवाय' का जप एक हजार लाभदायक सिद्ध होता है l

नोट-छिपकली गिरने का जो फल होता है, वहीं फल शरीर पर गिरगिट चढ़ने का भी होता है।

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